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Class 8 sanskrit chapter 15 hindi translation

  पञ्चदशः पाठः प्रहेलिकाः Hindi translation कस्तूरी जायते कस्मात्?  को हन्ति करिणां कुलम् ?  किं कुर्यात् कातरो युद्धे?  मृगात् सिंहः पलायते ॥1|| कस्तूरी किससे उत्पन्न होती है? कौन हाथियों के समूह को मार देता है? कायर व्यक्ति युद्ध में क्या करते हैं? हिरण से, सिंह से भाग जाते हैं। सीमन्तिनीषु का शान्ता?  राजा कोऽभूत् गुणोत्तमः?  विद्वभिः का सदा वन्द्या?  अत्रैवोक्तं न बुध्यते ।|2|| नारियों में कौन सबसे अधिक शान्त स्वभाव वाली है? सीता। राजाओं में गुणों में उत्तम कौन है? राम । विद्वान हमेशा किसकी वन्दना करते है? विद्या। यह यहाँ नहीं बताया गया है। कं सञ्ज्घान कृष्णः ?  का शीतलवाहिनी गङ्गा? के दारपोषणरताः?  कं बलवन्तं न बाधते शीतम् ।।3।। श्रीकृष्ण ने किसको मारा? कंस को। शीतल (ठण्डी) धरा वाली गंगा को बहाने वाली जगह कौन-सी है? काशी। पत्नी सहित बच्चों के पालन-पोषण में कौन लगे होते हैं? खेती के काम में संलग्न किसान। किस बलवान को ठण्ड कष्ट नहीं देती? कम्बल वाले व्यक्ति को। वृक्षाग्रवासी न च पक्षिराजः त्रिनेत्रधारी न च शूलपाणिः।  त्वग्वस्त्रधारी न...

Class 8 sanskrit chapter 14 hindi translation

  चतुर्दशः पाठः आर्यभटः Hindi translation पूर्वदिशायाम् उदेति सूर्यः पश्चिमदिशायां च अस्तं गच्छति इति दृश्यते हि लोके। परं न अनेन अवबोध्यमस्ति यत्सूर्यो गतिशील इति । सूर्योऽचलः पृथिवी च चला या स्वकीये अक्षे घूर्णति इति साम्प्रतं सुस्थापितः सिद्धान्तः। सिद्धान्तोऽयं प्राथम्येन येन प्रवर्तितः स आसीत् महान् गणितज्ञः ज्योतिर्विच्च आर्यभटः पृथिवी स्थिरा वर्तते इति परम्परया प्रचलिता रूढिः तेन प्रत्यादिष्टा। सूर्य पूर्व दिशा से उदय होता है और पश्चिम में छिप जाता है ऐसा ही संसार में देखा गया है। परंतु इससे यह अनुमान नहीं लगाना चाहिए कि सूर्य गतिशील है। सूर्य स्थिर है और पृथ्वी गतिशील है जो अपने अक्ष पर घूमती है यह सिद्धांत अब पूरी तरह स्थापित है। इस सिद्धान्त को सर्वप्रथम जिन्होंने प्रारम्भ किया, वह महान गणित के ज्ञाता और ज्योतिषी आर्यभट थे। पृथ्वी स्थिर है, परम्परा से चली आ रही इस प्रथा का उन्होंने खण्डन किया। तेन उदाहृतं यद् गतिशीलायां नौकायाम् उपविष्टः मानवः नौकां स्थिरामनुभवति, अन्यान् च पदार्थान् गतिशलान् अवगच्छति । एवमेव गतिशीलायां पृथिव्याम् अवस्थितः मानवः पृथिवीं स्थिरामनुभवति सूर्...

Class 8 sanskrit chapter 13 hindi translation

  त्रयोदशः पाठः क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः Hindi translation सुपूर्ण सदैवास्ति खाद्यान्नभाण्ड नदीनां जलं यत्र पीयूषतुल्यम् ।  इयं स्वर्णवद् भाति शस्यैधरेयं  क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः ॥1॥ खाद्यान्न के पात्र सदा परिपूर्ण रहते हैं, जहाँ नदियों का जल अमृत के समान है, यह (भारत) भूमि फसलों के द्वारा सुशोभित है। पृथ्वी पर भारत स्वर्ण भूमि के रूप में शोभायमान है। 'त्रिशूलाग्निनागैः पृथिव्यस्त्रघोरैः  अणूनां महाशक्तिभिः पूरितेयम् ।  सदा राष्ट्ररक्षारतानां धरेयम्  क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः ||2|| त्रिशूल, अग्नि, नाग तथा पृथ्वी आदि भयंकर अस्त्रों के द्वारा तथा परमाणु महाशक्ति के द्वारा यह पूर्ण है। यह राष्ट्र रक्षा में लीन (वीरों ) की पृथ्वी है। पृथ्वी पर भारत स्वर्ण भूमि के रूप में शोभायमान है। इयं वीरभोग्या तथा कर्मसेव्या  जगद्वन्दनीया च भूः देवगेया।  सदा पर्वणामुत्सवानां धरेयं  क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः ॥3॥ यह वीरों के द्वारा भोग्य, कर्म के द्वारा सेवनीय, विश्व के द्वारा स्तुति करने योग्य तथा देवताओं के द्वारा आने योग्य भूमि है। यह सदा पूर्...

Sanskrit counting in hindi 1 to 100

   1 प्रथमः एक One  2 द्वितीयः दो Two  3 तृतीयः,त्रीणि तीन Three  4 चतुर्थः चार Four  5 पंचमः पाँच Five  6 षष्टः छः Six  7 सप्तमः सात Seven  8 अष्टमः आठ Eight  9 नवमः नौ Nine  10 दशमः दस Ten  11 एकादशः ग्यारह Eleven  12 द्वादशः बारह Twelve  13 त्रयोदशः तेरह Thirteen  14 चतुर्दशः चौदह Fourteen  15 पंचदशः, पञ्चदश पन्द्रह Fifteen  16 षोड़शः सोलह Sixteen  17 सप्तदशः सत्रह Seventeen  18 अष्टादशः अठारह Eighteen  19 एकोनविंशतिः, ऊनविंशतिः उन्नीस Nineteen  20 विंशतिः बीस Twenty  21 एकविंशतिः इक्कीस Twenty One  22 द्वाविंशतिः बाइस Twenty Two  23 त्रयोविंशतिः तेइस Twenty Three  24 चतुर्विंशतिः चौबीस Twenty Four  25 पञ्चविंशतिः पच्चीस Twenty Five  26 षड्विंशतिः छब्बीस Twenty Six  27 सप्तविंशतिः सत्ताईस Twenty Seven  28 अष्टविंशतिः अट् ठाईस Twenty Eight  29 नवविंशतिः, एकोनत्रिंशत् उनतीस Twenty Nine  30 त्रिंशत् तीस Thirty  31 एकत्रिंशत् इकत्त...

वर्णे के उच्चारण स्थान चार्ट पर दर्शाए।

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अवकाश हेतु प्रार्थना पत्र संस्कृत में

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 अवकाश हेतु प्रार्थना पत्र संस्कृत में |

Sanskrit ma parichay

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Class 8 sanskrit chapter 12 hindi translation part 2

  द्वादशः पाठः कः रक्षति कः रक्षितः Hindi translation Part - 2 (नदीतीरं गन्तुकामा: बाला: यत्र तत्र अवकरभाण्डारं दृष्ट्रा वार्तालापं कुर्वन्ति) (नदी के किनारे जाने के इच्छुक बालक जहाँ- तहाँ- गंदगी के  ढेर देखकर वार्तालाप करते हैं) जोसेफ: पश्यंतु मित्राणि यत्र तत्र प्लास्टिकस्यूतानि अन्यत् चावकरं प्रक्षिप्तमस्तिः । कथ्यते यत् स्वच्छता स्वास्थ्यकरी परं वयं तु शिक्षिताः अपि अशिक्षित इवाचरामः अनेन प्रकारेण जोसेफ मित्र देखो जहाँ- तहाँ प्लास्टिक का थैला तथा अन्य कूड़ा फेंका हुआ है। कहा जाता है कि स्वच्छता स्वास्थ्यकर होती है परंतु हम शिक्षित होते हुए भी अनपढ़ों की तरह आचरण करते हैं। वैभव- गृहाणि तु अस्माभिः नित्यं | स्वच्छानि क्रियन्ते परं किमर्थं स्वपर्यावरणस्य स्वच्छतां प्रति ध्यानं न दीयते विनय - पश्य पश्य उपरितः इदानीमपि अवकर मार्गे क्षिप्यते । वैभव- इस प्रकार हम घरों को नित्य | स्वच्छ करते हैं परंतु किसलिए अपने पर्यावरण की स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। विनय - देखो, देखो ऊपर से अब भी मार्ग में कूड़ा डाला जा रहा है | (आहूय ) महोदय कृपा कुरु मार्गे भ्रमद्भ्यः । एतत् तु स...

Class 8 sanskrit chapter 12 hindi translation part - 1

 ‌ द्वादशः पाठः कः रक्षति कः रक्षितः Hindi translation Part - 1 (ग्रीष्मर्ती सांयकाले विद्युदभावे प्रचंडोष्मा पीड़ित: वैभव: गृहात निष्क्रामति) गर्मी की ऋतु में शाम को बिजली के अभाव में तेज़ गर्मी के द्वारा पीड़ित वैभव घर से बाहर निकलता है। वैभव - अरे परमिंदर! अपि त्वमपि विदयुदभावेन पीड़ितः बहिरागत ? वैभव- अरे परमिंदर! क्या तुम भी बिजली के अभाव से पीड़ित होकर बाहर आ गए हो? परमिंदर - आम् मित्र! एकत: प्रचंडातपकाल: अन्यतश्च विद्युदभावः परं बहिरागत्यापि पश्यामि यत् वायु वेग: तु सर्वथाऽवरुद्धः। सत्यमेवोक्तम् परमिंदर - हाँ, मित्र! एक तो तेज़ गर्मी का समय दूसरे बिजली का अभाव - परंतु बाहर आकर भी देखता हूँ कि वायु की गति पूर्णतः रुक गई है सच ही कहा है | प्राणिति पवनेन जगत् सकलं, सृष्टि निखिला चैतन्मयी क्षणमपि न जीव्यतेऽनेन विना, सर्वातिशायिमूल्यः पवनः ।। पवन के द्वारा समस्त जगत तथा चैतन्यपूर्ण यह समग्र सृष्टि जीवित है। इसके बिना क्षण भर भी जीवित नहीं रहा जाता है। सबसे अधिक मूल्य वाली वायु है। विनयः - अरे मित्र! शरीरात न केवलं श्वेद बिंदव: अपितु श्वेदधाराः इव प्रस्रवन्ति स्मृतिपथमायति शुक्ल म...

Class 8 sanskrit chapter 11 hindi translation

  एकादशः पाठः सावित्री बाईफुले Hindi translation उपरि निर्मितं चित्रम् पश्यत । इदम् चित्रम् कस्याश्चित् पाठशालायाः वर्तते । इयं सामान्या पाठशाला नास्ति । इयमस्ति महाराष्ट्रस्य प्रथमा कन्या पाठशाला एका शिक्षिका गृहात् पुस्तकानि आदाय चलति । ऊपर बने हुए चित्र को देखो। यह चित्र किसी पाठशाला का है । यह सामान्य पाठशाला नहीं है। यह महाराष्ट्र की पहली कन्या पाठशाला है। एक अध्यापिका घर से पुस्तके लेकर चलती है | मार्गे कश्चित् तस्याः उपरि धूलिं कश्चित् च प्रस्तरखण्डान् क्षिपति। परं सा स्वदृढनिश्चयात् न विचलति । स्वविद्यालये कन्याभिः सविनोदम् आलपन्ती सा अध्यापने संलग्ना भवति । तस्याः स्वकीयम् अध्ययनमपि सहैव प्रचलति । केयं महिला ? अपि यूयमिमां महिलां जानीथ? | इयमेव महाराष्ट्रस्य प्रथमा महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले नामधेया। रास्ते में कोई उसके ऊपर धूल और पत्थर के छोटे टुकड़े फेंकता है परंतु वह अपने दृढ़ निश्चय से विचलित नहीं होती। अपने विद्यालय में कन्याओं के साथ हँसी मजाक करती हुई अपने अध्यापन में लगन से लगी रहती है। उसका अपना अध्ययन भी साथ ही चलता है। कौन है यह महिला ? तुम भी इस महिला को ज...

Class 8 sanskrit chapter 10 hindi translation

  दशमः पाठः नीतिनवनीतम् Hindi translation 1. अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन: ।  चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्।। अनुवाद- स्वभाव से हमेशा प्रणाम करने वाले की, बड़े बूढ़ों की सेवा करने वाले की चार चीजें बढ़ती हैं- आयु, विद्या, यश और बल ॥ 2.थं मातापितरौ क्लेशं सहते सम्भवे नृणाम | न तरथ निष्कृति: शक्या कर्तुं वर्षशरीरपि।। अनुवाद - जब माता-पिता मनुष्य (बच्चे) को जन्म देते समय जो कष्ट सहन करते हैं, उसका बदला सौ वर्षों तक भी नहीं चुकाया जा सकता। 3. तयोर्नित्यं प्रियम् कुर्यादाचार्यस्य च सर्वदा ।  तेष्वेव त्रिषु तुष्टेषु तपः सर्वः समाप्यते ।। अनुवाद उन दोनों का (माता पिता) और गुरु का हमेशा प्रिय करना चाहिए। उन तीनों के प्रसन्न होने पर सभी तप समाप्त हो जाते हैं। 4. सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम् ।  एतद्विद्यात्समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः ।। अनुवाद - दूसरों के अधीन होने पर हमेशा दुखी होते हैं, अपने वश में हमेशा सुखी रहते हैं। सुख-दुख की यह संक्षिप्त में परिभाषा दी गई है । 5. यत्कर्म कुर्वतोऽस्य स्यात्परितोषोऽन्तरात्मनः ।  तत्प्रयत्नेन कुर्वीत विपरीतं तु...

Class 8 sanskrit chapter 9 hindi translation

  नवमः पाठः सप्तभगिन्यः Hindi translation अध्यापिका- सुप्रभातम् ।  छात्राः - सुप्रभातम् । सुप्रभातम् ।  अध्यापिका - भवतु किं पठनीयम् ? अध्यापिका - सुप्रभात  छात्रा - सुप्रभात | सुप्रभात |  अध्यापिका - अच्छा। क्या पढ़ना है ? छात्राः - वयं सर्वे स्वदेशस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामः ।  अध्यापिका – शोभनम्। वदत। अस्माकं देशे कॅति राज्यानि संति ?  सायरा - चतुर्विंशति: महोदये - ! छात्रा - हम सभी अपने देश के राज्यों के विषय में जानकारी रखना चाहते हैं। अध्यापिका - बहुत अच्छा । बोलो हमारे देश में कितने राज्य हैं ? सायरा - चौबीस श्रीमती (महोदये) ! सिल्वी - न हि न हि महाभागे अध्यापिका अन्यः कोऽपि ....? ! पञ्चविंशति : राज्यानि सन्ति । स्वरा- ( मध्ये एव) महोदये मे भगिनी कथयति यदस्माकं देशे अष्टाविंशतिः राज्यानि संति । एतदतिरिच्य सप्त केन्द्रशासितप्रदेशा: अपि सन्ति । शिल्वी - नहीं नहीं महोदया | पच्चीस राज्य हैं। 1 अध्यापिका और कोई भी)  स्वरा - बीच में ही महोदया मेरी बहन कहती है कि हमारे देश में 28 राज्य हैं । इसके अतिरिक्त सात केंद्र शासित प्रदेश भी हैं। अध्...

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Class 8 sanskrit chapter 8 hindi translation

  अष्टमः पाठः  संसारसागरस्य नायकाः Hindi translation के आसन् ते अज्ञातनामान: ?  शतशः सहस्रशः तडागा: सहसैव शून्यात् न प्रकटीभूता: । इमे एव तडागा: अत्र संसारसागरा: इति । एतेषाम् आयोजनस्य नेपथ्ये निर्मापयितृणाम् एककम्, निर्मातॄणां च दशकम् आसीत्। कौन थे वे अज्ञात नाम वाले ? सैकड़ों, हजारों तालाब अचानक ही आकाश से प्रकट नहीं हुए । यह तालाब ही यहाँ संसार सागर हैं। इनके आयोजन के पीछे बनवाने वाले एक (इकाई )और बनाने वाले दहाई(दस) थे। एतत् एककं दशकं च आहत्य शतकं सहस्रं वा रचयत: स्म । परं विगतेषु द्विशतवर्षेषु नूतनपद्धत्या समाजेन यत्किञ्चित् पठितम्।पठितेन तेन समाजेन एककं दशकं सहस्रकञ्च इत्येतानि शून्ये एव परिवर्तितानि। यह एक से दस दस से सौ तथा सौ से आकर हजारों की रचना हुई परंतु बीते हुए दो सौ वर्षों में नई पद्धति के द्वारा समाज ने जो कुछ पढ़ा । उस पठित समाज ने इकाई, दहाई और हजार को शून्य में बदल दिया । अद्य ये अज्ञातनामान: वर्तन्ते, पुरा ते बहुप्रथिताः आसन् । अशेषे हि देशे तडागा: निर्मीयन्ते स्म, निर्मातारोऽपि अशेषे देशे निवसन्ति स्म। आज जो अज्ञात नाम वाले हैं, पहले वे बहुत प्रसिद्ध थ...

Class 8 sanskrit chapter 7 hindi translation

  सप्तमः पाठः भारतजनताऽहम् Hindi translation अभिमानधना विनयोपेता, शालीना भारतजनताऽहम्।  कुलिशादपि कठिना कुसुमादपि, सुकुमारा भारतजनताऽहम्।। स्वाभिमान रूपी धन वाली विनय और शालीनता से भरी हुई मैं भारत की जनता हूँ ।पत्थर से भी अधिक कठोर और फूल से भी अधिक कोमल में भारत की जनता हूँ । निवसामि समस्ते संसारे, मन्ये च कुटुम्बं वसुन्धराम्। प्रेयः श्रेयः च चिनोम्युभयं, सुविवेका भारतजनताऽहम् मैं सारे संसार में निवास करती हूँ और समस्त भूमंडल को अपना परिवार मानती हूँ । रुचिकर और कल्याणप्रद दोनों रास्तों को चुनती हूँ । विवेक से परिपूर्ण मैं भारत की जनता हूँ । विज्ञानधनाऽहम् ज्ञानधना, साहित्य कला संगीतपरा। अध्यात्म सुधातटिनी स्नानैः, परिपूता भारत जनताऽहम्।। विज्ञान रूपी धन वाली, साहित्य, संगीत कला से परिपूर्ण अध्यात्म रूपी अमृतमयी नदी में स्नान से पवित्र मैं भारत की जनता हूँ । मम गीतैर्मुग्धं समं जगत्,मम नृत्यैर्मुग्धं समं जगत्। मम काव्यैर्मुग्धं समं जगत्,रसभरिता भारत जनताऽहम्।। मेरे गीतों के द्वारा सारा संसार मुग्ध है, मेरे नृत्य के द्वारा सारा संसार मुग्ध है । मैरे काव्यों कैं द्वारा सारा सं...

Class 8 sanskrit chapter 6 sanskrit to hindi translation

  षष्ठःपाठः गृहं शून्यं सुतां विना Hindi translation "शालिनी ग्रीष्मावकाशे पितृगृहम् आगच्छति।  सर्वे प्रसन्नमनसा तस्या: स्वागतं कुर्वंति परं तस्या: भ्रातृजाया उदासीना इव दृश्यते"। "शालिनी गर्मी की छुट्टियों में पिता के घर आती है। सभी प्रसन्न मन होकर उसका स्वागत करते परंतु उसकी भाभी उदास सी प्रतीत होती |" शालिनी भ्रातृजाय! चिंतिंता इव प्रतीयसे, सर्वं कुशलम् खलु? माला - आम् शालिनी । कुशलिनी अहम् ।त्वदर्थम् किं आनयामि, शीतलपेयं चायं वा ? शालिनी – भाभी! तुम चिंतित सी प्रतीत होती हो। सब कुशल तो है । माला- हाँ शालिनी! मैं कुशल हूँ । तुम्हारे लिए क्या लाऊँ ठंडा या चाय? शालिनी- अधुना तु किमपि न वाञ्छामि ।रात्रौ सर्वै सह भोजनमेव करिष्यामि । (भोजन कालेऽपि मालाया: मनोदशा स्वस्था न प्रतीयते स्म, परं सा मुखेन किमपि नोक्तवती) शालिनी -अब तो मैं कुछ नहीं चाहती हूँ, रात में सबके साथ भोजन ही कर लूँगी । (भोजन के समय भी माला की मनोदशा स्वस्थ प्रतीत नहीं होती थी परंतु उसने मुख से कुछ नहीं कहा) राकेश:- भगिनि शालिनि। दिष्ट्या त्वं समागता। अद्य मम कार्यालये एका महत्त्वपूर्ण गोष्ठी सहसैव नि...

Class 8 sanskrit chapter 5 sanskrit to hindi translation

  पञ्चमः पाठः कण्टकेनैव कण्टकम् Hindi translation आसीत् कश्चित् चञ्चलो नाम व्याधः।पक्षीमृगादिनां ग्रहणेन स्वीयां जीविका निर्वाहयति स्म । एकदा स: वने जालं विस्तीर्यं गृहम् आगतवान्।अन्यस्मिन् दिवसे प्रात:काले यदा चञ्चल: वनं गतवान् तदा सः दृष्टवान् यत् तेन विस्तारते जाले दौर्भाग्याद् एक बेद्ध: आसीत् । कोई चंचल नाम का शिकारी था। पशु-पक्षी आदि को पकड़कर वह अपनी जीविका चलाता था। एक बार वह वन में जाल बिछाकर घर आ गया।दूसरे दिन सुबह जब वह वन में गया तब उसने देखा कि उसके द्वारा बिछाए गए जाल में दुर्भाग्य से एक बाघ फँस गया। व्याघ्र: क्लान्तः आसीत् ।सोऽवदत् भो मानव ! पिपासुः अहम् । नद्या: जलमानीय मम पिपासां शमय । व्याघ्रः जलं पीत्वा पुनः व्याधमवदत् शमय मे पिपासा | साम्प्रतं बुभुक्षितोऽस्मि। इदानीम् अहं त्वां खादिष्यामि । चञ्चलः उक्तवान् अहं त्वतकृते धर्मम् आचरितवान् ।त्वया मिथ्या भणितम्।त्वं मां खादितुम् इच्छसि ?  बाघ थका हुआ था।वह बोला- हे मानव! मैं प्यासा हूँ, नदी का जल लाकर मेरी प्यास शांत करो। बाघ ने जल पीकर फिर शिकारी को बोला मेरी प्यास शांत हुई ।।अब मैं भूखा हूँ । इस समय मैं तुम्हें...

Class 8 sanskrit chapter 4 sanskrit to hindi translation

  चतुर्थः पाठः सदैव पुरतो निधेहि चरणम् Hindi translation चल चल पुरतो निधेहि चरणम्। सदैव पुरतो निधेहि चरणम्॥ चलो चलो कदम आगे रखो | सदा ही कदम आगे बढाओ | (इन पंक्तियों में कवि सदा ही आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दे रहे हैं ) गिरिशिखरे ननु निजनिकेतनम्।  विनैव यानं नगारोहणम्।। बलं स्वकीयं भवति साधनम्। सदैव पुर....................... || पर्वत के शिखर पर ही अपना निवास है। ( हमें ) किसी यान के बिना ही वहाँ तक चढ़ना होगा, ( हमारा ) खुद का बल ही एकमात्र साधन है। ( इसलिए ) सदा ही आगे बढ़ते रहो । पथि पाषाणा: विषमाः प्रखराः ।  हिंस्त्राः पशवः परितो घोराः ।।  सुदुष्करं खलु यद्यपि गमनम्।  सदैव पुरो....................... || पथ पर असामान्य नुकीले पत्थर हैं और भयानक | हिंसक पशु चारो ओर हैं (बाधा उत्पन्न करने के लिए ) | | परन्तु इस अत्यंत कठिनतापूर्वक साध्य लक्ष्य तक हमें अवश्य ही जाना होगा । ( इसलिए ) सदा ही आगे बढ़ते रहो । जहीहि भीतिं भज-भज शक्तिम् ।  विधेहि राष्ट्रे तथाऽनुरक्तिम्।।  कुरु कुरु सततं ध्येय-स्मरणम्।  सदैव पुरतो.................... || डर को छोड़ो, शक्त...