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Class 7 sanskrit Chapter 11 hindi translation

  एकादशः पाठः समवायो हि दुर्जयः Hindi translation पुरा एकस्मिन् वृक्षे एका चटका प्रतिवसति स्म। कालेन तस्याः सन्तति: जाता। एकदा कश्चित् प्रमत्तः गजः तस्य वृक्षस्य अधः आगत्य तस्य शाखां शुण्डेन अत्रोटयत्। चटकायाः नीडं भुवि अपतत्। तेन अण्डानि विशीर्णानि। अथ सा चटका व्यलपत्। तस्याः विलापं श्रुत्वा काष्ठकूट: नाम खगः दुःखेन ताम् अपृच्छत् " भद्र, किमर्थं विलपसि?" इति। पहले के समय में एक वृक्ष पर चिड़िया थी। समथ के साथ उसके सन्तान बडे़ हो गऐ। ऐक बार कोई मस्त हाथी ने उस वृक्ष के नीचे आकर उस पड़ की टहनी को सूंड से तोड़ दिया। चिड़िया का घोंसला जमीन पर गिर गया । उस चिड़िया अंडे फूट गए । तब वह चिड़िया रोने लगी। उसके बिलाप को सुनकर काष्ठकूट नाम का पक्षी दुःख पूर्वक उससे पूछा की तूम किसलिए रो रही हौ?" चटकावदत्-"दुष्टेनैकेन गजेन मम सन्ततिः नाशिता। तस्य गजस्य वधेनैव मम दुःखम् अपसरेत्।" ततः काष्ठकूट: तां वीणारवा-नाम्न्याः मक्षिकायाः समीपम् अनयत्। तयोः वार्तां श्रुत्वा मक्षिकावदत्-"ममापि मित्रं मण्डूकः मेघनाद: अस्ति। शीघ्रं तमुपेत्य यथोचितं करिष्याम:।" तदानीं तौ मक्षिकया...

Class 7 sanskrit Chapter 10 hindi translation

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Class 7 sanskrit Chapter 9 hindi translation

  नवमः पाठः  अहमयि विद्यालयं गमिष्यामि   Hindi translation मालिनी - (प्रतिवेशिनी प्रति) गिरिजे! मम पुत्र मातुलगृहं प्रति प्रस्थित काचिद्अन्यां कामपि महिला कार्यार्थ जानासि तर्हि प्रेषय। मालिनी - (बगलवाले के प्रति) गिरजा! मेरा पुत्र मामाघर गया है, कोई दूसरी अन्य महिला काम जानती हो तो (मुझसे) कहना।   गिरिजा - आम् सखि। अद्य प्रातः एवं मम सहायिका स्वसुतायाः कृते कर्मार्थ पृच्छति स्म। श्वः प्रातः एव तया सह वाता करिष्यामि। (अग्रिमदिने प्रातः काले पट्वादने एव मालिन्या: गृहघण्टिका आगन्तार कमपि सूचयति मालिनी द्वारमुदघाटयति पश्यति यत् गिरिजायाः सेविकया दर्शनया सह एका अष्टवर्षदेशीय, बालिका तिष्ठति) गिरिजा - हां सखी, आज सुबह ही मेरी सहायिका अपनी पुत्री के लिए काम के लिए पूछ रही थी। कल सुबह ही उसके साथ बात करुँगी। अगले दिन सुबह के समय छ: बजे ही मालिनी के घर की घंटी किसी आनेवाले की सूचना देती है। मालिनी द्वार खोलती है देखती है कि गिरिजा की सेविका दर्शना के साथ एक लगभग आठ वर्ष की लड़की खड़ी है। दर्शना - महोदये। भवती कार्यार्थ गिरिजामहोदयां पृच्छति स्म कृपया मम सुतायै अवसर प्रदाय अन...